“राजस्थान के इतिहास में पहली बार कि किसी राजस्थानी फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला

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तीसरा विश्वयुद्ध पेयजल के लिए होगा ये हम नहीं बुजुर्ग कहते हैं और गहराते पेयजल संकट को देखे तो ये सही भी लगता है क्योंकि हर साल प्रदेश में भूमिगत जल स्तर तेजी से गिर रहा है 90 के दशक में 40 फीट के आस-पास रहने वाला जल स्तर अब 250 फीट से ज्यादा गहराई में जा चुका है ऐसे में किसानों के साथ तो सिंचाई पानी की परेशानी है ही, कई इलाकों में पेयजल के भी लाले पड़े हैं लोग पानी के लिए दर दर भटक रहे हैं ऐसे में पेयजल संकट का एक ही समाधान है जल बचाना, और इसके लिए आवश्यक है लोगों को वर्षा के पानी को संरक्षित करने के लिए जागरुकता करने की इस ज्वलंत मुद्दे पर कई फिल्में भी बनी हैं जिनमें एक है राजस्थानी फिल्म ‘टर्टल’ यह फिल्म वास्तविक कहानी पर आधारित है जिसे 23 दिसंबर को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया ऐसी फिल्में न केवल लोगों को ज्वलंत मुद्दों से रू-ब-रू करवाती हैं बल्की इससे प्रादेशिक फिल्में बनाने वाले निर्माताओं को भी प्रोत्साहन मिलता है जिससे फिल्मों के जरिए क्षेत्रिए संस्कृति को पहचान मिलती है फिल्म समाज का आईना होती है फिल्मो सें समाज बनता और बिगड़ता है फिल्मो और टीवी में जैसा होता है समाज भी उसी कदमो पर चलता है कई फिल्मे समाज को नई दिशा देती हैं लेकिन क्षेत्रिए फिल्मों की बात करें तो निर्माता ज्वलंत मुद्दों पर फिल्म बनाते हैं फिल्म प्रदर्शित भी होती है लेकिन ऐसी फिल्मों को पहले रिलीज में तो फिर दर्शक नहीं मिल पाते हैं जबकि ये फिल्मे नेशनल अवॉर्ड तक जीतती हैं हम बात कर रहे हैं नेशनल अवॉर्ड विजेता राजस्थानी फिल्म ‘टर्टल’ की  जिसमें संजय मिश्रा ने अभिनय किया फिल्म को नेशनल अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ राजस्थानी फिल्म का अवॉर्ड दिया गया फिल्म के निर्माता चौधरी के अनुसार, “राजस्थान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी राजस्थानी फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला है यह फिल्म जल संकट पर आधारित है, जो 195 देशों का ज्वलंत मुद्दा है

पहचान खोता राजस्थानी सिनेमा

बॉलीवुड सिनेमा जहां साल में दर्जनों मूवी रिलीज़ करता है, वहीं राजस्थानी सिनेमा दिनों-दिन पहचान खोता जा रहा है  हालात ये हैं कि अब साल में 1 या 2 मूवी ही आती हैं  गौरतलब है कुछ वर्षों से राजस्थानी फिल्में कम बन रही हैं और जब राजस्थानी फिल्मे कम बन रही हैं तो राजस्थान की संस्कृति की झलक भी देखने को नहीं मिलेगी  मेकर्स और इंडस्ट्री के लोगों की माने तो स्थानीय सिनेमा के ग्रोथ का एक कारण सिंगल स्क्रीन बंद होना, हायर लेवल की मूवी नहीं बनना, कंटेंट सही नहीं होना, मूवीज का बजट कम होना, क्वालिटी वर्क पर ध्यान नहीं होना प्रमुख है मल्टी प्लेक्स के लेवल की मूवी बने तो ऑडियंस आएगी और बजट भी बढ़ाना होगा

 

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