बाबोसा के नाम से सभी के दिलों में एक अलग ही पहचान बनाकर रखने वाले भैरोसिंह शेखावत

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राजस्थान की दिग्गज शख्सियतों का जब भी नाम लिया जाएगा तब भारत के उपराष्ट्रपति रहे दिवंगत भैरोंसिंह शेखावत का नाम सबसे पहले आएगा….बाबोसा के नाम से सभी के दिलों में एक अलग ही पहचान बनाकर रखने वाले भैरोसिंह ने प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां संभाली…वे तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहे….शेखावत का जन्म 23 अक्टूबर 1923 तत्कालिक जयपुर रियासत के गांव खाचरियावास में हुआ था….

भैरों सिंह शेखावत को जोड़-तोड़ की राजनीति का मंझा हुआ खिलाड़ी कहा जाता था..अल्पमत में रहकर भी सरकार बनाना कोई इनसे सीखे…. राजस्थान में भाजपा की जड़े जमाई और तीन बार मुख्यमंत्री रहे…अपनी राजनीति शैली के कारण कई बार देशभर में सुर्खियों में भी रहे…उस जमाने में भाजपा की अंदरुनी कलह तेज होती तो संकटमोचन के रूप में शेखावत को ही याद किया जाता था…गुजरात और दिल्ली के कई मामलों में इन्होंने भाजपा को संकट से उभारा था…जब भी भाजपा संकट में फंसी इनका राजनीतिक अनुभव पार्टी के काम आया….ऐसी शख्सीयत थे पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत…

भैरों सिंह शेखावत का राजनैतिक करियर

भैरों सिंह शेखावत ने 1952 में राजनीति में प्रवेश किया…साल 1952 में वे रामगढ़ से विधायक थे….साल 1957 में श्री माधोपुर, 1962 और 1967 से वे किसान पोल से विधायक थे…साल 1972 के चुनावों में वे हार गए…लेकिन 1973 में वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए…साल 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर रोहतक जेल भेजा गया था….

तो वही साल 1977 में आपातकाल के बाद वे जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में छाबड़ा से विधायक बने…उस साल जनता पार्टी ने राजस्थान के राज्य विधानसभा चुनावों में 200 सीटों में से 151 सीटें जीतीं….और शेखावत ने 1977 में राजस्थान के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला…उनकी सरकार को 1980 में इंदिरा गांधी ने खारिज कर दी थी…

साल 1980 में भैरों सिंह शेखावत छाबरा से फिर से विधायक बने और विपक्ष के नेता भी थे…साल 1985 में, वे निम्बाहेड़ा से विधायक थे…. शेखावत एक बार फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और धौलपुर से विधायक थे…1992 में उनकी सरकार बर्खास्त कर दी गई और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया…..

भैरों सिंह शेखावत को 2002 में भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया था….जब उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार सुशील कुमार शिंदे को हराकर 750 वोटों में से 149 वोटों के अंतर से हराया था…

शेखावत ने राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा  लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन-वाम समर्थित उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल से हार गई..वे राष्ट्रपति चुनाव हारने वाले पहले उपाध्यक्ष बने..इस हार के बाद, शेखावत ने 21 जुलाई 2007 को उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था….

भैरों सिंह शेखावत ने “अंत्योदय योजना” शुरू की…जिसका उद्देश्य गरीब से गरीब व्यक्ति का कल्याण करना था….विश्व बैंक के अध्यक्ष, रॉबर्ट मैकनामारा ने उन्हें भारत के रॉकफेलर के रूप में संदर्भित किया….

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